ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Monday, September 29, 2008

संस्कार

तीज त्यौहार
ना निकालो मित्र
मन की भडास
वैस ही ज़माने मे गम
कुछ कम नहीं है
कब कुछ हो जाये
और हम से
ईद दिवाली
भी ना मनाई जाये
माहोल को मीठा
ईद दिवाली
पर बनाओ
इस बार
बिना वाद विवाद के
संस्कार कुछ मीठे
मिल कर सब दे जाओ

धर्म की परिभाषा

कभी कभी मन कहता हैं
कि
आओ सब मिल कर
एक साथ
विसर्जित कर दे
हर धर्म ग्रन्थ को
हर मूर्ति को
हर गीता , बाइबल
कुरान और गुरुग्रथ साहिब को
एक ऐसे विशाल सागर मे
जहाँ से फिर कोई
मानवता इनको बाहर
ना ला सके
किस धर्म मे लिखा हैं
की धमाके करो
मरो और मारो
और अगर लिखा हैं
तो चलो करो विसर्जित
अपने उस धर्म को
अपनी आस्था को
अपने मन मे रखो और
जीओ और जीने दो
मानवता अब शर्मसार हो रही हैं
तुम्हारी धर्म की परिभाषा से

Thursday, September 25, 2008

क्या करूँ अब कैसे लिखू

बहुत दिन से
दिल कि कलम
से कुछ नहीं लिखा
क्यूँ
सूख गयी हैं मन कि स्याही
लोगो के काले मन देख कर
काली स्याही से काले शब्द

नहीं लिख पाती
और लहू के रंग के लाल शब्दों से
अपना ही मन डरता हैं

Monday, September 08, 2008

मीमांसा समीक्षा विवाद अपवाद

बुराइयों की मीमांसा करते करते
अच्छाइयों की समीक्षा करना
हम कबका भूल चुके
समय रहते चेत जाते
तो याद रहता की
विवादो की होती हैं मीमांसा
और
अपवादों की होती हैं समीक्षा
विवाद से अपवाद का सफर
बहुत था आसन बस
हम ही रास्ता भटक गए

Tuesday, September 02, 2008

अपने पराये

परायों कि भीड़ में
अपनों को ढूंढना
बहुत ही आसन है
बस ज़रा पीछे
मुड कर देख लो
जो तुम्हारे साये पर
पाँव रख
नहीं चल रहा है
वही तुम्हारा अपना हैं
वही चल रहा है
तुम्हारे साथ साथ ।