ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .
ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Monday, February 23, 2009

हिन्दी ब्लोगिंग की क्लास

हिन्दी ब्लोगिंग की क्लास मे
नैतिकता का पीरियड था
सीनियर सिटिज़न पढा रहे थे
सीनियर सिटिज़न पढ़ रहे थे
ब्लैक बोर्ड पर नारी के
अर्ध नग्न चित्र थे
सब विद्यार्थी ताली बजा रहे थे
चित्र समझ ना आने पर
उसकी डिटेल मे जा रहे थे
अब नैतिकता का प्रश्न हो !!
नारी शरीर पर बात ना हो ??
कुँवारी कैसे स्त्री बनती हैं
जब तक अधेड़ उम्र के
ब्लॉगर समझे और समझायेगे नही
यौन शिक्षा का प्रचार क्यूँ
ग़लत हैं भारत मे
इस विषय पर चर्चा कैसे कर पायेगे ??

हर प्रश्न का जवाब शिक्षक दे रहा था
जहाँ जहाँ जरुरत थी प्रतीकात्मक हो रहा था
नारी को घर मे ही रहना था
बाहर क्यूँ आयी
अब बाहर आयी है तो नग्न उसको कहो
बार बार शास्त्रार्थ करने को कहता था
अब शास्त्रार्थ कौन करता
सब तो ताली बजा रहे थे
एक दो नटखट बच्चो ने
कक्षा मे झाँका तो
केवल वयस्कों का बोर्ड लगा पाया

अब नारी देह पर बात केवल
व्यसक ही भारत मे करते हैं
रिटायर होने की सीमा हो जाए
तब भी इस विषय मे
बच्चो की तरह पढ़ते हैं
और ताली भी बजाते हैं

नग्न औरत के चित्र
इन्टरनेट पर जो लगाते हैं
स्रोत का नाम देना भी भूल जाते हैं
चोरी जो करते हैं
चोरी गलत काम हैं
बार बार वही दोहराते हैं

और बंद दरवाजो के पीछे ही नहीं
खुले आम ब्लॉग पर
नग्न नारी को निहारते


disclaimer is kavita kaa kisi jeenda yaa murda blog post sae koi laena daena nahin haen

कमेन्ट यहाँ करे

Saturday, February 21, 2009

संस्कृति और संस्कार

वही इतिहास मे नाम दर्ज कराते हैं
जो इतिहास पढ़ते नहीं
इतिहास बनाते हैं
इतिहास पढ़ना यानि
दूसरो कि बनी लकीरों पर चलना
लकीर सीधी तो सीधी चाल
लकीर टेढी तो टेढी चाल
अपना क्या ? , बस लकीर पीटना
संस्कृति
लकीरों और इतिहास मे नहीं हैं दर्ज ।
संस्कृति ,
बसती मन मे
मिलती हैं कोख मे
और
लोग खोजते हैं संस्कृति को
किताबो मे
शोलोको मे
उद्धरण मे
सांख्यिकी मे
सर्वेक्षण मे
गीता मे
बाइबल मे
कुरान मे
सब कहते हैं
माँ देती हैं संस्कार
जबकि सत्य ये हैं
कि माँ देती हैं संस्कृति
संस्कार और संस्कृति मे
होता हैं फरक बहुत
संस्कृति से संस्कार मिल सकते हैं
पर संस्कार से संस्कृति
ना बनती हैं ना बिगड़ती हैं
नाम इतिहास मे दर्ज करना हैं
तो लकीर एक नयी बनाओ
जिस पर चल कर
अपनी संस्कृति से
अपने संस्कार तक जाओ

Thursday, February 19, 2009

संस्कृति और संस्कार

वही इतिहास मे नाम दर्ज कराते हैं
जो इतिहास पढ़ते नहीं
इतिहास बनाते हैं
इतिहास पढ़ना यानि
दूसरो कि बनी लकीरों पर चलना
लकीर सीधी तो सीधी चाल
लकीर टेढी तो टेढी चाल
अपना क्या ? , बस लकीर पीटना
संस्कृति
लकीरों और इतिहास मे नहीं हैं दर्ज ।
संस्कृति ,
बसती मन मे
मिलती हैं कोख मे
और
लोग खोजते हैं संस्कृति को
किताबो मे
शोलोको मे
उद्धरण मे
सांख्यिकी मे
सर्वेक्षण मे
गीता मे
बाइबल मे
कुरान मे
सब कहते हैं
माँ देती हैं संस्कार
जबकि सत्य ये हैं
कि माँ देती हैं संस्कृति
संस्कार और संस्कृति मे
होता हैं फरक बहुत
संस्कृति से संस्कार मिल सकते हैं
पर संस्कार से संस्कृति
ना बनती हैं ना बिगड़ती हैं
नाम इतिहास मे दर्ज करना हैं
तो लकीर एक नयी बनाओ
जिस पर चल कर
अपनी संस्कृति से
अपने संस्कार तक जाओ

Tuesday, February 17, 2009

रात और सुबह

जाती हुई रात एक सुबह लेकर आती हैं

जिन्दगी जीने वालो को

अंधरे उजाले का सबक सिखा जाती हैं

Saturday, February 14, 2009

चलो ज़िन्दगी का जशन मनाये

कभी बिना कारण मुझे कुछ लिखो
कभी बिना कारण मुझे कुछ कहो
कभी बिना कारण मेरे साथ रहो
कभी बिना प्यार किये भी कहो की करते हों
कुछ करने के लिये हमेशा कारण क्यो चाहिये
और किसी कारण ही कुछ क्यो करना चाहिये
तुम हों
मै हूँ
चलो ज़िन्दगी का जशन मनाये
अपनी अपनी आत्मा के सच को स्वीकार
ले

HAPPY VALENTINE'S DAY

चित्र आभार www.myorkutglitter.com

So Let Us Celebrate The Life

Some Times Write To Me
Even When There Is Nothing To Write
Some Times Call Me
Even When There Is Nothing To Say
Some Times Be With Me
Even When There Is No Reason
Some Times Say You Love Me
Even When You Don't
Why Always Do Everthing
With Reasoning
Why Always Do Everything
For A Reason
I Am There
You Are There
So Let Us Celebrate The Life
By Being Our True Self

Friday, February 13, 2009

ना किया हो इजहार अगर बसंत पर , तो कर लो वलेंटाइन डे पर

वैलेंटाइन डे हो या हो बसंत

हम तो प्यार का हर दिन

मनायेगे ज़ोर शोर से

जितना जितना बढेगा आतंकवाद

जितना जीतना दूर हमें धर्म करेगा

उतना उतना जरुरी होगा

बार बार मानना दिन

बसंत और वलेंटाइन का

जो करते हैं विरोध मोहब्बत का

दे जवाब मेरे एक सवाल का

जो मुहब्बत ना होती तो

वो क्या इस दुनिया मे होते ?

मोहब्बत से ही ये दुनिया हैं

और

दिन बहुत है कम मुहब्बत के

सो जिस को जिस से मुहब्बत हैं

ना किया हो इजहार अगर बसंत पर

तो कर लो वलेंटाइन डे पर

और भी दो चार दिन ऐसे बनाओ

जब बात हो प्यार कि इकरार कि

जिस देश मे ताज महल हैं

प्यार हैं , विश्वास हैं

उस देश मे नफरत क्यों आयेगी

बसंत और वलेंटाइन से ही सही

प्यार कि खुशबु

फिर मेरे देश को महकाएगी

Thursday, February 12, 2009

ना किया हो इजहार अगर बसंत पर , तो कर लो वलेंटाइन डे पर

वैलेंटाइन डे हो या हो बसंत

हम तो प्यार का हर दिन

मनायेगे ज़ोर शोर से

जितना जितना बढेगा आतंकवाद

जितना जीतना दूर हमें धर्म करेगा

उतना उतना जरुरी होगा

बार बार मानना दिन

बसंत और वलेंटाइन का

जो करते हैं विरोध मोहब्बत का

दे जवाब मेरे एक सवाल का

जो मुहब्बत ना होती तो

वो क्या इस दुनिया मे होते ?

मोहब्बत से ही ये दुनिया हैं

और

दिन बहुत है कम मुहब्बत के

सो जिस को जिस से मुहब्बत हैं

ना किया हो इजहार अगर बसंत पर

तो कर लो वलेंटाइन डे पर

और भी दो चार दिन ऐसे बनाओ

जब बात हो प्यार कि इकरार कि

जिस देश मे ताज महल हैं

प्यार हैं , विश्वास हैं

उस देश मे नफरत क्यों आयेगी

बसंत और वलेंटाइन से ही सही

प्यार कि खुशबु

फिर मेरे देश को महकाएगी

Thursday, February 05, 2009

कितनी आसान होती ये ज़िन्दगी

कितनी आसान होती ये ज़िन्दगी
अगर दोस्त लबादा ना पहने होते
बहुत आसान होता है
दुशमनो को पहचानना
पर दोस्ती का लबादा
पहने दुशमनो को
कैसे पह्चानु
जो बार बार मिलते है
नये नये भेस मे
और जब जाते है
तो सब एक से लगते
है

Sunday, February 01, 2009

माँ का आँचल

हर वो आँचल
जहाँ आकर
किसी का भी मन
बच्चा बन जाये
और अपनी हर
बात कह पाए
जहाँ तपते मन को
मिलती हो ठंडक
जहाँ भटके मन को
मिलता हो रास्ता
जहाँ खामोश मन को
मिलती हो जुबा
होता है एक माँ
का आँचल
कभी मिलता है
ये आंचल एक
सखी मे
तो कभी मिलता है
ये आँचल एक
बहिन मे
तो कभी मिलता है
ये आँचल एक
अजनबी मे
ओर कभी कभी
शब्द भी एक
आँचल बन जाते है
इसी लिये तो
माँ की नहीं है
कोई उमर
ओर परिभाषा