ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Monday, March 30, 2009

याद को भूलना

याद रखने के लिये
वक्त नहीं मुहब्बत चाहिये
भूलने के लिये
वक्त नहीं जिद चाहिये

बस यूँही

कभी कभी

कितना सुकूं देता हैं

किसी का

बस यूँही

हमें भूल जाना

Saturday, March 28, 2009

उम्र

उम्र
जी ली तो अपनी
कट गई
तो बेगानी

मै अपनी धरती को अपना वोट दूंगी आप भी दे कैसे ?? क्यूँ ?? जाने

शनिवार २८ मार्च २००९
समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजे
घर मे चलने वाली हर वो चीज़ जो इलेक्ट्रिसिटी से चलती हैं उसको बंद कर दे
अपना वोट दे धरती को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिये
पूरी दुनिया मे शनिवार २८ मार्च २००९ समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजे

ग्लोबल अर्थ आर { GLOBAL EARTH HOUR } मनायेगी और वोट देगी अपनी धरती को ।
इस विषय मे ज्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध हैं

Friday, March 27, 2009

बस ऐसे ही , बस यूँही

आज फिर आँख मे
आया एक आंसू
आप के नाम का
बहने नहीं दिया
रुसवा कर जाता

Thursday, March 26, 2009

बस ऐसे ही , बस यूँही

आज फिर आँख मे
आया एक आंसू
आप के नाम का
बहने नहीं दिया
पानी हो जाता

Monday, March 23, 2009

इसके आगे क्या हुआ , यहाँ पढे

सांझा ब्लॉग पर एक पोस्ट आयी
पोस्ट मे एक टिप्पणी आयी
टिप्पणी मे अपशब्द आये
जो लावण्या को नहीं भाये
अपने लिये होते तो भूल भी जाती
माँ के लिये थे तो भूल ना पायी
तुंरत लावण्या ने एक पोस्ट बनाई
सांझे नहीं निज ब्लॉग पर लगाई
अपनी माँ के प्रति दिये अपशब्दों
पर आपत्ति जतायी
निज का ब्लॉग था , अपनी माँ थी
आपत्ति भी अपनी थी

इसके आगे क्या हुआ , यहाँ पढे
व्हाट अन आईडिया सर जी

Saturday, March 14, 2009

रिश्ता

होती हैं बेइमानी उसी रिश्ते मे
जिस रिश्ते का कोई नाम होता हैं
अनाम ही रहने दो हर रिश्ता
ईमानदारी से निभ तो जायेगा

जीवन की त्रिवेणी

तुम , मै
हम
जीवन


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रास्ता , मंजिल
पतझर , बहार
जीवन

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दोस्त , दुश्मन
पाना , खोना
जीवन

Friday, March 06, 2009

मेरे मन की कामना

होली या फागुन
लाये बस हँसी ठिठोली
अबीर गुलाल से रंग जाये
सबके मन और तन
दूर हो कालिमा आतंक कि
होली के रंगों से
बस यही हैं कामना
मेरे मन की