ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .
ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Wednesday, April 29, 2009

पाना

ना पा के उनको

पाया हैं जो मैने

पा के भी उनको

ना पा पाती

Sunday, April 26, 2009

जिन्दगी बीत रही हैं

दूर जाने की मज़बूरी

ना मिल पाने की मज़बूरी

कमजोरियों को मज़बूरी बना देना

थी उनकी मज़बूरी या कमजोरी

जिन्दगी बीत रही हैं

समझने मे मेरी

Thursday, April 23, 2009

बारात , खाना और रिश्ते

देर से पहुचती बाराते

ठंडा परसा खाना

ठंडे पड़ते रिश्ते

Wednesday, April 22, 2009

शब्दों के जाल

शब्दों की दस्तक से
शब्दों के दरवाजे खुलते हैं
शब्दों के जाल मे यूही नहीं शब्द फँसते हैं

Tuesday, April 21, 2009

पीड़ा न बंटने की

बंटाने को न बाँट सकने की पीड़ा

तब होती हैं जब तुम पास नहीं होते

Saturday, April 18, 2009

बस ऐसे ही बस यूँही

उफ़ क्या मज़बूरी हैं

दिल मे रहते हैं

पराये कहलाते हैं

Friday, April 17, 2009

बस ऐसे ही बस यूँ ही

उफ़ क्या मज़बूरी हैं

ना आते हैं ना बुलाते हैं

Monday, April 13, 2009

फलसफा

किसी ने कहा
जिन्दगी एक फलसफा हैं
शायद इसीलिये
फल की कामना नहीं करनी चाहिये
सफा होने मे देर नहीं होगी

Wednesday, April 08, 2009

खेल

जिन्दगी की धुप छावं मे

खेल वो खिलाते रहे

हम खेलते रहे

एक बार ही बस

खेल था खेला हमने

और खेल खेलना

वो भूल गए

Monday, April 06, 2009

मै वही रहूंगी जहाँ थी

दूसरो की जिन्दगी संवारने के

खेल मे अपनी जिन्दगी से

जब खेल चुको

तो मुझ तक वापस आ जाना

और अपनी जिन्दगी संवार लेना

मै वही रहूंगी जहाँ थी

Friday, April 03, 2009

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला


हिंदुस्तान मे धर्म हैं
मुस्लिम , सिख , ईसाई
और हिंदू ?

धर्मं नहीं हैं "हिंदू"
हिंदुस्तान मे
हिंदू यानि
हिंदुस्तान की सभ्यता और संस्कृति
हिंदू यानि सर्वधर्म समन्वयता
हिंदू यानी सर्वधर्म सहिष्णुता

पाकिस्तान मे हिंदू यानी एक धर्म
इटली मे हिंदू यानी एक धर्म
लन्दन मे हिंदू यानी एक धर्म

पर हिंदुस्तान मे हिंदू
यानी
एक जीवन शैली
एक आस्था
एक विश्वास

Thursday, April 02, 2009

आत्मीयता का एक पल

कौन छीन सकता हैं हमसे
नियतिबद्ध हमारी आत्मीयता के पलो को
छोटे लेकिन जिन्दगी से लबालब पल
जिनसे बदल गयी हमारी जिंदगी
सदा के लिये
वो पल जिन्होने समझाया
की अस्वीकृति नहीं बदल सकती हैं
प्यार को भावना को
पल की स्वीकृति से ही
बदल जाती हैं जिन्दगी
तुमने पल को स्वीकार किया
मैने पल को स्वीकार किया
हमारी आत्मीयता के उस एक पल को
और जिन्दगी को जी लिया उस एक पल मे