ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Saturday, May 30, 2009

सबके लिये क्यूँ नहीं हैं

कम उम्र विवाहिता
माँ नहीं बना चाहती
समाज कहता हैं
नहीं गर्भपात नहीं करवा सकती

कम उम्र अविवाहिता
माँ बनना चाहती हैं
समाज कहता हैं
नहीं गर्भपात करवा दो

बच्चे का आना
खुशी अगर हैं
माँ बनना खुशी अगर हैं

तो सबके लिये क्यूँ नहीं हैं

{ बालिका वधु सीरीयल की आज की कड़ी देखकर बस यही समझ आया }

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Friday, May 29, 2009

सप्तपदी अधूरी ही रही

पहला कदम मजबूर हुए तुम
दूसरा कदम दूर हुए तुम
तीसरा कदम ओझल हुए तुम
चौथा कदम बिसर गए हम
और
सप्तपदी अधूरी ही रही

Monday, May 25, 2009

बस ऐसे ही बस यूँही

आंसूं ही बस अपने होते हैं
इसीलिये तो लोग अकेले मे रोते हैं

कमेंट्स यहाँ दे

Sunday, May 24, 2009

जिन्दगी का सच

रास्ता
रूकावटे
भटकाव

रास्ता
रूकावटे
थकान


रास्ता
रूकावटे
मंजिल


जिन्दगी का सच
सबकी नियति
चलना

Monday, May 18, 2009

जिन्दगी

जिंदगी

महसूस हुई

तो जी ली

ना महसूस हुई

तो काट ली

Thursday, May 14, 2009

बेटे जैसी नहीं होती हैं बेटियाँ

मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं
कह कर कब तक
बेटी को बेटे से कमतर मानोगे
और
कब बेटी को सिर्फ़ और सिर्फ़ इस लिये चाहोगे
कि वो बेटी तुम्हरी हैं

हर समय बेटे रूपी कसौटी पर
क्यों बेटियों के हर किये को
कसा जाता हैं


और कब तक बेटियों को
अपना खरा पन
बेटे नाम कि कसौटी पर
घिस घिस कर
साबित करना पडेगा

कुछ इतिहास हमे भी बताओ
कुछ कारण यहाँ भी दे जाओ
बेटो ने ऐसा क्या किया
जो बेटी को बेटे जैसा
तुम बनाते जाते हो
और उसके अस्तित्व को
ख़ुद ही मिटाते जाते हो

या
बेटे जैसा कह कर
अपने मन को संतोष तुम देते हो

बेटा और बेटी
दोनों अंश तुम्हारे ही हैं
फिर जैसा कह कर
एक आंख को क्यूँ
दूसरी से नापते हो


बेटे जैसी नहीं होती हैं बेटियाँ
बेटियाँ बस बेटियाँ होती हैं

Wednesday, May 13, 2009

ईश्वर बस बेटी न देना

लडकियां इतना कैसे लड़ लेती हैं
कैसे अपने लिये हर जगह
जगह बना लेती हैं ??
कैसे जीतना हैं उनको
अपना मिशन बना लेती हैं ??
कैसे कम खाना खा कर भी
सेहत सही रहे ये जान लेती हैं ??

बहुत आसन हैं
जब माँ के पेट मे होती हैं
तभी से सुनती हैं
माँ की हर धड़कन कहती हैं
इश्वर लड़की ना देना
जो कष्ट मैने पाया
वो संतान को पाते ना देख पाउंगी
हे विधाता बेटी ना देना

बस यही सुन सुन कर नौ महीने मे
माँ के खून के साथ
सरवाईवल ऑफ़ फीटेस्ट
की परिभाषा
को जीती हैं लडकियां

और

जिन्दगी की आने वाली लड़ाई के लिये
अपने को तैयार कर लेती हैं

हर सफल लड़की के पीछे
होती हैं एक माँ की
कामना की
ईश्वर बस बेटी न देना

कमेंट्स देना की इच्छा हो आए तो यहाँ जाए ईश्वर बस बेटी न देना

Tuesday, May 12, 2009

बस यूँ ही

बदनुमा

जिन्दगी

दाग

मुहब्बत

Sunday, May 10, 2009

बस ऐसे ही बस यूँ ही

रिश्ता

खामोशी
यादे

आवाजे
दलीले

Thursday, May 07, 2009

अनैतिकता बोली नैतिकता से

अनैतिकता बोली नैतिकता से
मंडियों , बाजारों और कोठो
पर मेरे शरीर को बेच कर
कमाई तुम खाते थे
अब मै खुद अपने शरीर को
बेचती हूँ , अपनी चीज़ की
कमाई खुद खाती हूँ
तो रोष तुम दिखाते हो
मनोविज्ञान और नैतिकता का
पाठ मुझे पढाते हो
क्या अपनी कमाई के
साधन घट जाने से
घबराते हों
इसीलिये
अनैतिकता को नैतिकता का
आवरण पहनाते हो
ताकि फिर आचरण
अनैतिक कर सको
और
नैतिक भी बने रह सको

निशब्द शब्दों की निःशब्दता

निशब्द शब्दों की निःशब्दता

Tuesday, May 05, 2009

चाहतें

कुछ हम चाहतें थे

कुछ तुम चाहतें थे

कुछ वो चाहतें थे

काश इतनी जुदा ना होती

हम सबकी चाहतें

Monday, May 04, 2009

तस्वीर

देख कर तस्वीर तुम्हारी
लगा की वक़्त थम गया
फिर याद आया
तस्वीर नहीं निशानी
देख रही थी मै

Saturday, May 02, 2009

पाना खोना

पाने को पा कर खोना

एक उपलब्धि होती हैं

खोने के डर को जीतना

भी एक उपलब्धि होती हैं

पाया ना होता तो
खोया कैसे होता

Friday, May 01, 2009

अभिनव नजदीकियाँ शाश्वत दूरियाँ

ना करना कामना

नज़दीकियों की

दूरियाँ भी

नज़दीकियों से ही आती हैं

वैसे कभी कभी

उनकी दूरियों मे भी

उनकी नजदीकियाँ ही

नज़र हमे तो आती हैं

अभिनव नजदीकियां ही

होती हैं शाश्वत दूरियाँ