ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Tuesday, June 23, 2009

बस ऐसे ही

कविता अगर बनती होती शब्दों से

तो हर लेखक कवि होता

कविता के लिये शब्द नहीं

भाव चाहिये

और भाव के लिये

कोई भाव देने वाला चाहिये

Saturday, June 13, 2009

दूरियाँ कमजोरियाँ मजबूरियाँ

मजबूरियाँ

नहीं

कमजोरियाँ

लाती हैं संबंधो मे

दूरियाँ

रिश्ता

कोई भी

कैसा भी

क्यूँ ना हो

डोर हैं

बस नेह की

कमजोरियां

उसको तोड़ती हैं

और

मजबूरियों की गांठे

नहीं जोड़ सकती

कोई भी रिश्ता

जो टूट गया हैं

कमजोरियों से

Thursday, June 04, 2009

हमे तुम्हारा प्यार नहीं तुम्हारा कर्तव्य चाहिये

पुरानी पीढी बोली

नयी पीढी से

तुम क्या जानो

हमने क्या क्या किया हैं अपने

माता पिता के लिये

अब अगर करनी को कथनी का

साक्ष्य चाहिये

तो करनी और कथनी के अन्तर को

हर पुरानी पीढी

नयी पीढी को

समझाती ही रहेगी

श्रवण कुमारो की तादाद

पीढी दर पीढी

साक्ष्य के लिये

धूल भरे रास्तो पर

चलती रहेगी

बच्चे कभी जवान नहीं

सीधे बूढे ही बनेगे

और हर नयी पीढी के कर्मो को

पुरानी पीढी रोती रहेगी

हमने तुम्हे पैदा किया

तुम हमको ढोते रहो

क्युकी हमे तुम्हारा

प्यार नहीं तुम्हारा कर्तव्य चाहिये