ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Friday, July 24, 2009

चुटकियाँ

चुटकियाँ जो काटते हैं
शालीनता का मुलम्मा ओढ़ कर
वो भूल जाते हैं
की पाँच उँगलियों की छाप
हर मुलम्मे को उतार देती हैं
और रह जाता हैं नंगा शरीर
और उससे भी ज्यादा नंगा मन
कपडे बस तन ढकते हैं
कपड़ो मे मन ढकने की ताकत नहीं होती
सभ्यता अगर कपड़ो से आती
तो हर सफेदपोश सभ्य ही होता

Tuesday, July 21, 2009

भईया हम तो ब्लॉगर भले

साहित्य रचा नहीं जाता
साहित्य रच जाता हैं
रचियता ख़ुद अपनी रचना को
साहित्य साहित्य नहीं चिल्लाता हैं


कालजयी होगा तो रह जायेगा
साहित्य तब ख़ुद बन जायेगा
वरना गूगल के साथ ही
विलोम हो जाएगा

सो भईया हम तो ब्लॉगर भले
मुद्दे पे लिखे , विवादों मे घिरे
मन बीती कहे जग बीती सहे
पर अपने लिखे को कभी
साहित्य ना कहे

Saturday, July 18, 2009

श्रवण को जन्म दिन की आशीष

कहते है लोग की बेटा पैदा करो

तो ही माँ बनोगे

पर नहीं हैं ऐसा ।

दो बेटे पाये हैं मैने इस ब्लॉग जगत मे

एक हैं कमलेश मदान और दूसरे है श्रवण

दोनों ही माँ कह कर बुलाते हैं

और मन को असीम सुख दे जाते हैं

कल हैं जन्म दिन

मेरे श्रवण का

सो उसको आशीष हैं मेरी

की वो जिन्दगी मे जो चाहे वो पाये

नहीं मिली मै दोनों से

पर जो सुख उनसे मैने पाया हैं

वो असीम हैं

और उसके लिये हर दुआ

कुछ कम हैं

आप भी दे आशीष

श्रवण को

उसके १८ वर्ष मे

श्रवण ने अपने ब्लॉग पर मेरी बहुत सी कविताओं को अपनी समझ से हिन्दी से इंग्लिश मे ट्रांसलेट किया हैं । ये उसकी इच्छा थी की उसके जन्मदिन पर मे इस ब्लॉग पर उसके नाम से कविता दूँ , सो लिख दी लेकिन कमलेश मदान स्वत ही याद आगये

Wednesday, July 15, 2009

बस एक अल्पविराम लेने को अब जी चाहता हैं

आज कल मन करता हैं
कि एक अल्प विराम आजाये
जिन्दगी कि
साँसों कि
रफ़्तार थम जाए
कोई स्पंदन ना महसूस हो
सब कुछ रुक जाये
बस ठहर जाये
जो जैसा हैं जहाँ हैं
वैसा ही
और फिर
जब अल्पविराम ख़तम हो तो
जिन्दगी मे
केवल यादे ना हो
अंतरंगता की
अंतरंगता हो
कामना न हो
पूर्णता हो
इसीलिये
बस एक अल्पविराम
लेने को अब जी चाहता हैं

Wednesday, July 08, 2009

चुटकियाँ

चुटकियाँ जो काटते हैं
शालीनता का मुलम्मा ओढ़ कर
वो भूल जाते हैं
की पाँच उँगलियों की छाप
हर मुलम्मे को उतार देती हैं
और रह जाता हैं नंगा शरीर
और उससे भी ज्यादा नंगा मन
कपडे बस तन ढकते हैं
कपड़ो मे मन ढकने की ताकत नहीं होती
सभ्यता अगर कपड़ो से आती
तो हर सफेदपोश सभ्य ही होता

Saturday, July 04, 2009

यादो का कबाड़

मेरे साथ बिताये पल
तुमको याद नहीं होगे

पर शायद याद होगा

वो चाबी का गुच्छा
वो दो आम
वो आईस क्रीम
वो किताबे
जो मै तुम्हारे लिये लाई थी
वो शर्ट जो तुमने मुझसे
अपने लिये खरीदवाई थी
वो कालीन जो तुमने
मुझ से मंगवाया था
और
वो गमला जो पैंट करके
अपने हाथो से तुमने मुझे दिया था
या वो किताब जो तुम मेरे लिये लाये थे

या फिर कहीं यादो मै होगी वो
कविता जो तुमको पसदं थी
और
तुमने मुझे चिट्ठी भेज कर पढ़वाई थी
और
मैने अपनी हस्त लिपि मै लिख कर
उसको फ्रेम जड़वा कर तुमको
वापस भिजवाई थी

अब ये सब तो जरुर याद होगा तुमको
चाहे मेरे साथ बिताये पल याद हो ना हो

भौतिक चीजों का यही फायदा होता हैं
कहीं न कहीं कबाड़ की तरह
हमेशा साथ तो रहती हैं

साथ बिताये पलो का क्या
गुज़रा वक़्त होते हैं
कभी वापस नहीं आते