ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Thursday, August 27, 2009

ये देश हैं वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानो का

ये देश हैं वीर जवानो का
अलबेलों का मस्तानो का
चढ़ता हैं नकली खून यहाँ
ये देश हैं वीर जवानो का


अलबेलों का मस्तानो का
करते हैं काम बच्चे यहाँ



ये देश हैं वर जवानो का
अलबेलों का मस्तानो का
गिरते हैं फ्लाईओवर यहाँ



ये देश हैं वीर जवानों का
अलबेलों का मस्तानो का
आती नहीं हैं बिजली यहाँ



ये देश हैं वीर जवानों का
अलबेलों का मस्तानो का
फिर भी खुश !!! हैं सब यहाँ

Saturday, August 15, 2009

बड़ी अजनबी लगती हैं ये दुनिया

जन्माष्टमी पर
मंदिरों के अन्दर लम्बी लाइने
बाल गोपाल को झुला झुलाने के लिए
मन्दिर के बाहर लम्बी लाइने
मेले कुचले कपड़ो मे
प्रसाद मांगते बाल गोपाल
जन्माष्टमी पर
मन्दिर के अन्दर
कृष्ण के साथ परस्त्री को पूजती सुहागिने
मन्दिर के बाहर हाथ मे हाथ डाल कर घुमते
नौजवान अविवाहित जोडे पर टंच कसती सुहागिने
१५ अगस्त पर
आज़ादी के जश्न को मानते परिवार
नौकरानी के देर से आने पर आहत

बड़ी अजनबी लगती हैं ये दुनिया

Thursday, August 06, 2009

पर्दे से निजता तक

कहते हैं लोग
निजता क्या होती हैं
सब पर्दे हटाओ
अन्दर क्या हैं
वो बाहर भी दिखाओ

लेकिन जब एक औरत
सब कपडे उत्तार कर
नाचती हैं
तो उसको आइटम गर्ल
भी यही कहते हैं

कपड़ो की कितनी महिमा हैं
बार बार बखानते हैं
और अपने समय मे दूसरो के
कपडे
पर्दों की तरह
पर्त दर पर्त ये ही खोलते हैं