ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Thursday, October 22, 2009

पंछी

ना जाने क्यूँ
यादो के झरोखों मे
वही पंछी आ के
बैठते हैं
जिनको दाना पानी
अब हम नहीं चुगा
सकते हैं

Friday, October 16, 2009

दिवाली की शुभ कामनाये

वो अहसास ही क्या
जो दिवाली पर
हर भूला , खोया , बिछडा रिश्ता
याद ना दिलाये

ईश्वर
मेरे हर भूले , खोये और बिछडे
रिश्ते के घर
इस बार भी दिवाली धूम धाम से आये

Friday, October 09, 2009

मोड़

जिन्दगी के मोड़
कितने अजीब होते
जिस मोड़ पर
कोई किसी से मिलता हैं
उस मोड़ पर ही
कोई किसी से
बिछड़ता हैं

Tuesday, October 06, 2009

स्वच्छ हिन्दुस्तान की नेम प्लेट

स्वच्छता का दम भरते हो

ज़रा बताओ फिर क्यों

एक पिता की दो संतान

अगर दो माँ से हैं

तो आपस मे कैसे

और क्यों विवाह

करती हैं

मौन ना रहो

कहो की हम यहाँ

इस हिन्दुस्तान मे

इसीलिये रहते हैं

क्युकी हम यहाँ

सुरक्षित हैं

संरक्षित हैं

कानून यहाँ के

एक होते हुए भी

हमारी तरफ ही

झुके हुए हैं

कहीं और जायगे

तो कैसे इतना

प्रचार प्रसार कर पायेगे

बस हिन्दुस्तान मे ही ये होता हैं

सलीम को यहाँ सलीम भाई

नारज़गी मे भी कोई सुरेश कहता हैं

तुम भाई हो हमारे तो भाई बन कर रहो

हम रामायण पढे

तुम कुरान पढो

ताकि हम तुम कहीं ऊपर जाए

तो राम और अल्लाह से

नज़र तो मिला पाये

ऐसा ना हो की

पैगम्बर की बात फैलाते फैलाते

तुम उनकी शिक्षा ही भूल जाओ

हम को हमारी संस्कृति ने यही समझया हैं

जो घर आता हैं

चार दिन रहे तो मेहमान होता हैं

और रुक ही जाए

तो घर का ही कहलाता हैं

घर के हो तो घर के बन कर रहो

हम तुम से रामायण नहीं पढ़वाते हैं

तुम हम से कुरान मत पढ़वाओ

धार्मिक ग्रन्थ हैं दोनों

पर अगर किताब समझ कर पढ़ सके

कुछ तुम सीख सको

कुछ हम सीख सके

तो घर अपने आप साफ़ रहेगा

और स्वच्छ हिन्दुस्तान नेम प्लेट की

उस घर को कोई जरुरत नहीं होगी ।

Monday, October 05, 2009

स्वच्छ हिन्दुस्तान की सच्ची आवाज

वो कहते हैं
मुस्लिम धर्म अपनाओ
हिन्दुस्तान स्वच्छ हो जाएगा
और सब
सब ठीक हो जाएगा

उफ़
हिन्दुस्तान मे
हिंदू धर्म मे
गलत ही क्या हैं
जो ठीक हो जाएगा
मुस्लिम धर्मं का प्रचार
करने से नहीं रोकता हैं
हिन्दुस्तान का कानून तुम्हे
ज़रा बताओ
अगर हम हिंदू धर्म का प्रचार
करना चाहे तो क्या होगा
एक मुस्लिम देश मे
क्या हमको भी करने दिया जायेगा
या
जेल भिजवाओगे
सारे आम कोडे लगवाओगे
हाथ कटवोगे
हमारे धर्म ग्रन्थ जलवाओगे
और कुरान हमसे पढ़वाओगे

क्यूँ नहीं इस स्वच्छता को विश्व्यापी बनाते हो
जो हमें सीखते हो ख़ुद क्यूँ नहीं अपनाते हो
हमारे देवी देवता की तस्वीरो को
जूते चप्पल पर छाप कर
सोचते हो अपमान कर रहे हो
हिंदू धर्म का
उस धर्म का जहां मानते हैं
कि संस्कार नसों से आते हैं
और इसी लिये पैर
हिंदू धर्म मे
बडो के छुये जाते हैं
जब जब जो भी
उस चप्पल को पहनेगा ,
हमारी संस्कृति और
सभ्यता से ख़ुद ही जुडेगा
और देवता हमारे
उसकी नसों मे
संचार करेगे हिंदू धर्मं का

हिंदू धर्म को
प्रचार और प्रसार
की जरुरत ही नहीं हैं
तुम करते रहो प्रचार प्रसार
मुस्लिम धर्म का



हिन्दुस्तान की स्वच्छता
का जिम्मा उठा रहे हो
तो कभी
अपने अन्दर भी झाँककर देखते
स्वच्छता की जिम्मेदारी
कौन उठाता हैं और
वो क्या कहलाता हैं
बस आज
ईमानदारी से
इसका जवाब दे ही दो
इस संकीण हिंदू को


मुझे नाज हैं कि मै हिंदू हूँ , फक्र हैं मुझे अपने धर्म पर और उसकी सहिष्णुता पर लेकिन हिंदू कमजोर नहीं हैं ये ही हैं स्वच्छ हिन्दुस्तान की सच्ची आवाज ।

Thursday, October 01, 2009

किश्ते

कर्ज थी दुशमनी उनकी
उत्तार दी एक मुश्त
उनको सजा देकर
कर्ज हैं प्यार उनका
उत्तार रहे हैं
किश्त दर किश्त
दिन बा दिन
उनको याद कर कर