ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Sunday, August 15, 2010

बस यू ही

भावों की अभिव्यक्ति कविता कहलाती हैं
अभिव्यक्ति मे भावं हो कविता खुद बा खुद बन जाती हैं

Thursday, August 12, 2010

तिरंगा






ए मेरे तिरंगे
जब तू लहराता हैं
ओठो पे मुस्कान लाता है
जब तू झुक जाता है
आंखे नम कर जाता है
ना जाने कितनी
भाषाओ , धर्मो , जातियो को
तू देता है एक छाँव
और देता है
एक शान बहुतो को
बन के कफ़न उनका
एहसास ही तेरा
काफी होता है
वंदे मातरम्
महसूस करने के लिये

Tuesday, August 10, 2010

ज़माने का सच

कहता हैं ज़माना
किसी कि बातो मे न आना

बिना किसी कि बातो मे आये
सच जमाना का
कौन समझ पाया हैं

Saturday, August 07, 2010

नाता कई जन्मो का

इस बार इस दुनिया से
मुझ से पहले तुम जाओगे
नहीं ये बद्दुआ नहीं हैं मेरी
ये मेरी दुआ हैं
अगले जन्म मे मुझे से
पहले तुम आओगे
तभी तो अपनी इच्छाओ की
अपने प्यार की
अपनी अतृप्त कामनाओं की
पूर्ति तुम कर पाओगे
और मुझे सम्पूर्ण अहसास के साथ पाओगे

तुम से पीछे
अगले जन्म मे मै आना चाहती हूँ
क्युकी अगले जन्म मे मै तुम्हे और
तुम्हारे प्यार को पाना चाहती हूँ

वो नाता जो इस जन्म मे बन सका
पर निभ ना सका
उसको अगले जन्म मै निभाना चाहती हूँ

दुआ हैं मेरी अगले जन्म मे तुम मुझसे पहले आना
इस लिये इस जन्म मे मुझ से पहले इस दुनिया से जाना

Sunday, August 01, 2010

बारिश की बूंदे

ये बारिश की बूंदे हैं
या आसमां से
जन्नत का नूर
धरती पर गिर रहा हैं
प्यासी धरती को सीच रहा हैं
और
ना जाने कितने
मनो को भिगो रहा हैं