ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .
ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Sunday, November 28, 2010

कुछ लोग औरत को जमीन समझते हैं

कुछ लोग औरत को जमीन समझते हैं
हमेशा पैरो तले रौंदते हैं
कुछ लोग औरत को जमीन समझते हैं
जब चाहते हैं बेचते खरीदते हैं
कुछ लोग औरत को जमीन समझते हैं
फसल पर फसल उगाते हैं
कुछ लोग औरत को जमीन समझते हैं
माँ कहते हैं पर कुपुत्र ही रहते हैं

Thursday, November 11, 2010

सच्चा प्यार

लोग कहते हैं उन्हे सच्चा प्यार नहीं मिला
कैसे मिलता
सब प्यार पाना चाहते हैं
करना कोई नहीं चाहता
किसी को जी भरकर प्यार कर के देखो
बस दे कर , दे कर देखो
उसके जाने के बाद
उससे सालो ना मिलने के बाद भी
यही महसूस होगा कि
उसने तुमको सच्चा प्यार किया
अगर प्यार तुम्हारा सच्चा होगा
तो सच्चे प्यार कि तलाश
तुमको कभी ना होगी

Tuesday, November 02, 2010

दिवाली



राम लौटे थे अयोध्या दिवाली पर
या दिवाली मनाई जाती हैं
क्युकी राम अयोध्या लौटे

पर तब से

दिवाली आती हैं हर साल
दीप भी जलते हैं सुबह तक हर साल

वो
दिवाली कब आयेगी
जब सारी बुराई जल जायेगी
और
अच्छाई का वनवास ख़तम होगा

राम का वनवास ख़तम हुए तो युग बीते
पर अच्छाई का वनवास अनंत काल से
अनंत काल तक चल रहा हैं

आईये दिवाली पर
अच्छाई को घर वापस लाये
और
सचाई के दीप जलाये