ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .
ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Monday, August 15, 2011

स्वतंत्रता दिवस की बधाई

स्वतंत्रता दिवस की बधाई
स्वतंत्रता जिस पीढ़ी ने पायी
वो स्वतंत्रता दे कर नयी पीढ़ी को
कहीं दूर काल में समायी
अब जो पीढ़ी हैं
वो स्वतंत्र ही आयी
पाने के कष्ट को उसने नहीं हैं जाना
लेकिन स्वंत्रता क्या होती हैं
उसने भी हैं माना
नयी पीढ़ी पर रखे विश्वास
जो पुरानी पीढ़ी से उसको मिला हैं
चाहे स्वतंत्रता हो या संस्कार
वो थाती वो आगे ले जायेगी
और अपनी नयी पीढ़ी को दे जाएगी

Thursday, August 11, 2011

मोड़


जिन्दगी के मोड़
कितने अजीब होते
जिस मोड़ पर
कोई किसी से मिलता हैं
उस मोड़ पर ही
कोई किसी से
बिछड़ता हैं

कहीं जिन्दगी मुड़ जाती हैं
कहीं क़ोई जिन्दगी से मुड़ जाता हैं
और कहीं
किसी को जिन्दगी मोड़ देती हैं

Monday, August 08, 2011

अकेला या एकाकी

मनुष्य दुनिया में
एकाकी आता हैं
एकाकी ही जाता हैं
शांति तब पाता हैं
जब दूसरो के जीवन में
नहीं झांकता हैं
बहुत से मनुष्य
एकाकी नहीं होते
अकेले होते हैं
वही संबंधो का
प्रदर्शन कर के
अपने अकलेपन को छिपाते हैं .
हे ईश्वर
जिनके पास सम्बन्ध हैं पर
फिर भी वो अकेले हैं
उनको
मानसिक विक्षिप्ता से बचाना



Sunday, August 07, 2011

दूरियाँ अपनों की

किसी अपने का दूर चले जाना
दूरियाँ दे जाता हैं
कष्ट तो कभी सुख
साथ लाता हैं
लेकिन
किसी अपने का दूरियाँ बढ़ाना
सिर्फ और सिर्फ
दर्द ही देता हैं

पास होकर भी जब अपने
पास नहीं होते
अपने होने का अहसास भी
जैसे साथ नहीं होता

Saturday, August 06, 2011

आयु बोध

आयु बोध
कौन कब और किसे करा पाया हैं
क्या आयु से बोध हमेशा ही आ जाता हैं
क्या "जी" और 'आदरणीय' कहने से
हर क़ोई हर किसी को
उसकी आयु योग्य आदर दे पाता हैं
विचारों के मंच पर
आयु बोध
महज विचारों से भटकना हुआ


कहा आपने
समझा आपने
सही आप का
गलत भी आपका
जब सब आप का था
तो क्षमा मेरी क्यूँ
वो भी आपकी हैं
अगर आप ने खुद को
क्षमा कर पाया
तो समझिये आयु बोध
हो पाया

Thursday, August 04, 2011

क्या

क्या से पहचान क्या हुई
बात लेने देने पर ख़तम हुई
क्या हर भूल
क्या हर चूक
का सार
बस लेना और देना हैं