ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Tuesday, December 27, 2011

बस पात्रो के नाम बदलते हैं

कहने को कहते हैं लोग
किस्सा हुआ ख़तम
कहानी हुई ख़तम
पर क्या कभी क़ोई कहानी ख़तम होती हैं
ख़तम होता हैं क्या कभी क़ोई किस्सा
जो जी लेते हैं पात्र बनकर कहानी को
उनके लिये कहानी जिन्दगी होती हैं
जो जी नहीं पाते कहानी को पात्र बनकर
उनके लिये कहानी मौत होती हैं
साल बदल जाते हैं पात्र बदल जाते हैं
जीवन बदल जाते हैं
शरीर मिट जाते हैं
आत्मा शरीर बदल लेती हैं पर
कहानी और किस्से वही रहते
प्यार भी नफरत भी
बस पात्रो के नाम बदलते हैं