ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Monday, January 30, 2012

खोज लो मेरे शब्दों मे अपने को

जीवन के इस नाट्य मंच
असंख्य किरदार में बटा हैं जीवन
कहता हैं क़ोई तुम ये हो
कहता हैं क़ोई तुम वो हो
यहाँ तक भी कहने वाले कहते हैं
जैसी दिखती हो वैसी तो नहीं हो
क्यूँ समझने की चाहत रखता हैं
हर क़ोई दूसरो को
शब्दों में दूसरो के
अपने को गर खोज लो
दूसरो को जीवन कुछ
आसाँ हो जाये

अभी कहीं से क़ोई आयेगा
और एक टिपण्णी फिर दे जाएगा
यहाँ सब अपने ही तो हैं
अपनों से कैसा दुराव छिपाव
ख़ैर
अगर खोज सको मेरे शब्दों मे अपने को
तो शब्द मेरे सार्थक हैं
लिखनी आती भी नहीं
बस शब्द हैं और उन शब्दों मे
मै नहीं आप हैं

Tuesday, January 17, 2012

नमी

तुम्हारे बिना मेरी जिन्दगी
ना पूरी हैं ना अधूरी हैं
क्या कहीं क़ोई कमी हैं
नहीं , आखों में बस
एक नमी हैं

Friday, January 13, 2012

तलाश मंजिल की

मजबूरियां
छीन लेती हैं
रास्ता चुनने का हक़
रास्ता सही हैं
या गलत हैं
कैसे होगा फैसला
अगर रास्ता बस हो
एक ही
चलना ही नियति हैं शायद
चुनना नहीं
मंजिल कैसे फिर पता होगी