ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Thursday, February 23, 2012

सुबह और रात

कभी कभी सोचती हूँ
अगर हर सुबह के बाद एक रात ना होती
तो क्या होता ?

क्या जिन्दगी यूहीं चलती

पता नहीं क्यूँ सबको यही कहते सूना हैं
हर रात के बाद एक सुबह जरुर होती हैं

क्या
सुबह की जरुरत रात से ज्यादा होती हैं ?

रात के सन्नाटे की आहटो में
निशब्द भी शब्द सुनायी देते हैं
और सुबह के शोर में
निशब्द शब्दों को मिलते हैं बोल

हर सुबह की एक रात जरुर
होनी चाहिये
ताकि
दूसरो से बात करते करते
अपने को भूल चुके हम
खुद से बात कर सके

Wednesday, February 22, 2012

आवाज टंकार बन चुकी हैं

कल
औरत
एक आवाज थी
दबा दी जाती थी

आज
औरत
एक टंकार हैं

अब लोग दबा रहे हैं
अपने कान
ताकि
टंकार सुनाई ना दे

कल की औरत की आवाज
आज की औरत की
टंकार बन चुकी हैं

kaments yahaan dae

आवाज टंकार बन चुकी हैं


नो
आवाज थी
दबा दी जाती थी

आज
औरत
एक टंकार हैं

अब लोग दबा रहे हैं
अपने कान
ताकि
टंकार सुनाई ना दे

कल की औरत की आवाज
आज की औरत की
टंकार बन चुकी हैं

kaments yahaan dae

Tuesday, February 14, 2012

अभिनव हो तभी है प्यार


सबसे ज़्यादा कहा गया
पर सबसे कम समझा गया
शब्द है प्यार

सबसे ज़्यादा चाहा गया
पर सबसे कम जीया गया
अहसास है प्यार


उससे पाने से ज्यादा
उसको देने मे था प्यार


उसके साथ रहने से ज़्यादा
उससे दूर होने मे है प्यार


जिये हुए को आत्मसात
करने मे है प्यार

महसूस करने को
तुम से
अभिव्यक्त ना करने मे है प्यार

पुरुष की ज़रूरत हो
स्त्री का सम्पर्ण हों
तो उस अनाम रिश्ते का
नाम है प्यार

पुरुष को जो पुरुष बनाए
स्त्री को जो स्त्री बनाये
वह संपूर्ण कर्म है प्यार

सच कहने की जो ताकत दे
सच स्वीकारने की जो शक्ति दे
वह भावना है प्यार

अभिनव हो तभी है प्यार
बाकी सब है व्यवहार


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Saturday, February 11, 2012

अभिन्न रिश्ता

अभिन्न रिश्ता

हर रिश्ता अभिन्न होता हैं
अभिन्न रिश्तो में
कभी ही क़ोई प्रगाढ़
रिश्ता बनता हैं

अभिन्न रिश्तो मे होती हैं
अभिन्न मित्रता
जो हर विभेद से ऊपर होती हैं

और कभी कभी अभिन्नता
मे छुपी होती हैं भिन्नता
पर फिर भी रिश्ता रहता हैं अभिन्न

Wednesday, February 01, 2012

याद


गाहे बगाहे
बिना बुलाये
जो आये
वो
याद
कहलाये