ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .
ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Tuesday, March 27, 2012

नियति

नियति
जब गलत समय पर
दो सही लोगो को
मिलवाती हैं
तो
हम कहते हैं 
दर्द और तकलीफ
नियति से मिला हैं

क्या सच मे
कोई समय गलत होता 
और
कोई व्यक्ति सही होता हैं

कहीं ऐसा तो नहीं हैं
की दो गलत व्यक्ति
सही समय पर मिले
और अलग हुए
क्युकी वो गलत थे

और हमेशा की तरह दोष
दिया गया
नियति को 

Thursday, March 22, 2012

असफल औरत यानी एक घुटन भरी डायरी

एक घुटन भरी डायरी
यानि
एक असफल औरत
एक सफल पुत्री
एक सफल पत्नी
एक सफल माँ
पर
एक असफल इंसान
मानसिक रूप से टूटी
सामाजिक रूप से सुरक्षित

गलती हमेशा अपनी नहीं
किसी और की खोजती

सब सुविधा से घिरी
फिर भी असंतुष्ट
सदियों से केवल साहित्य रचती
एक घुटन भरी डायरी लिखती
एक असफल औरत जो
इनसान ना बन सकी
राह अपनी ना चल सकी


क्योकी चाहती थी

राह के कंकर कोई चुन देता
सिर पर छाँव कोई कर देता
और

सफल इंसान वो कहलाती
घुटन से आजादी वो पाती

Wednesday, March 21, 2012

एक सवाल एक ही जवाब

ना जाने कितनी बार
बस पूछा जाता हैं
एक ही सवाल
तुम
अकेली कैसे रह लेती हो
अकेली कैसे जी पाती हो

जवाब बस इतना ही देती हूँ
मैने डर से डरना
कभी सीखा ही नहीं

जो भी जीत लेता हैं
डर के डर को
जीना खुद बा खुद
सीख जाता हैं

अकेला नहीं वो लेकिन होता हैं
हाँ एकाकी हो जाता हैं

मनुष्य दुनिया में
एकाकी आता हैं
एकाकी ही जाता हैं
शांति तब पाता हैं
जब दूसरो के जीवन में
नहीं झांकता हैं
बहुत से मनुष्य
एकाकी नहीं होते
अकेले होते हैं
वही संबंधो का
प्रदर्शन कर के
अपने अकलेपन को छिपाते हैं .
हे ईश्वर
जिनके पास सम्बन्ध हैं पर
फिर भी वो अकेले हैं
उनको
मानसिक विक्षिप्ता से बचाना

Wednesday, March 14, 2012

क्यूँ हमेशा

क्यूँ हमेशा
सच को महिमा मंडित करके
सच को दबाने की कोशिश रहती हैं

क्यूँ हमेशा
रिश्तो पर व्यंग करके
रिश्तो की गरिमा को निभाने की कोशिश रहती हैं

क्यूँ हमेशा
स्नेहियों की तारीफ़ करके
भीड़ जुटाने की कोशिश रहती हैं

क्यूँ हमेशा
अप्रवासी हो करके
भारतीये बने रहने की कोशिश होती हैं

क्यूँ हमेशा
अप्रवासी भारतीये बनते ही
भारतीये पर व्यंग और छिट्टाकशी की कोशिश होती हैं

Wednesday, March 07, 2012

होली की सभी को बधाई

त्यौहार पैसे से नहीं
प्यार से मनता हैं
और अभी ऐसी महंगाई
नहीं हैं आयी
अथाह प्यार हैं आपके
और मेरे पास भी
प्यार के अबीर और गुलाल से
रंगिये अपनी और मेरी आत्मा को

Tuesday, March 06, 2012

आत्मिक सफ़र

सालो से मेरे अन्दर
एक ख्वाइश थी
अपनी आत्मा को खोजने और पाने की

फिर मुझे वो मिली
तुम्हारे अन्दर

जिस दिन मैने अपनी आत्मा को पाया
उस दिन मैने शांति भी पाई

रास्ता बहुत लम्बा था
पर जो मिला वो अमूल्य था

अब मै अपनी आत्मा के साथ हूँ
और ये भी समझ गयी हूँ
की जिस दिन मुझे मेरी आत्मा मिल गयी

उसी दिन से तुम आत्मा विहीन होगये

मेरी आत्मा के साथी
जैसे मेरी आत्मा तुम्हारी अन्दर कैद थी
तुम्हारी मेरी अन्दर हैं

अगर फिर आत्मा के साथ जीना चाहते हो
तो मुझ तक आओ और
अपनी आत्मा ले जाओ

कब तक यूँ बिना आत्मा के भटकोगे
मेरी आत्मा के मित्र { soulmate }