ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Sunday, June 24, 2012

प्यार

दफ़न की हुई
यादो की कब्र पर
जिन्दगी का दिया
बुझने की लालसा मे
टिमटिमा रहा हैं

जब दिया बुझ जायेगा
कब्र को मज़ार कहा जाएगा
और
मन्नत मांगने के लिये
कोई ना कोई
अपने प्यार को पाने के लिये
अपनी यादो के साथ
वहां आकर
फिर एक दिया जलायेगा

प्यार फिर कहीं का कहीं
किसी ना किसी याद मे

किसी यादो की कब्र को
मज़ार बना ही जाएगा




Saturday, June 16, 2012

नागवार

याद आये तो तो नागवार होता हैं
याद ना आये तो भी नागवार होता हैं
जिन्दगी बीत जाए तो भी नागवार होता हैं
जिन्दगी कट जाए तो भी नागवार होता हैं
किसी का साथ नागवार होता हैं
किसी से मिलना नागवार होता
और कभी कभी तो जैसे जीना नागवार होता हैं

Wednesday, June 06, 2012

पदचिन्ह

जब भी मै यहाँ आती हूँ
किसी के पद चिन्ह पाती हूँ
और
आश्चर्य मे पड़ जाती हूँ
उनको तो यहाँ होना ही ना था
और कभी किसी के पद चिन्ह यहाँ
बड़ा सुख दे जाते हैं की
उनका आना बदस्तूर जारी हैं
लेकिन
कुछ कमजोर असुरक्षित  पदचिन्ह
मुझे निशब्द कर देते हैं