ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Wednesday, December 05, 2012

बस एक जवाब कुछ तलख सा अलग सा

जो आप करती हैं
वो सब मै भी करती हूँ
अपने घर मे
उसके साथ साथ
टैक्स भी भर्ती हूँ
अगर आप से कोई प्रश्न करता हैं
डू यु वर्क ??
तो आप को लगता हैं ये प्रश्न
बेमानी हैं
और आत्म मंथन आप को करना पड़ता हैं

काश आप भी काम करती
और फिर समझती
कितना सुख होता हैं
अपनी आय अर्जित करने का
और उसके साथ साथ
सरकार को टैक्स देने का

ताकि सरकारी योजनाये नयी बन सके
उनके लिये जो काम नहीं करते




बस एक जवाब कुछ तलख सा अलग सा  घुघूती जी की कविता पर