ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Tuesday, January 14, 2014

बस ऐसे ही , बस यूं ही

जिंदगी की दूरी तो वो बढ़ा ही रही थी
फिर दिल की दूरियां क्यूँ उन्होने बढ़ा दी

साथ ना रह पाने वजह
क्यूँ बन जाती हैं
साथ ना चल पाने की वजह

जिनको जिंदगी से हम अपनी निकाल देते हैं
वही अपने दिल से हमें निकाल देते हैं


किसी को जिंदगी से निकाल देने से बेहतर हैं
उसको दिल से निकाल देना
जिंदगी फिर भी चलती रहती हैं
पर किसी के दिल मे रहने से
धड़कन थम सी जाती हैं और
याद बनकर रुक रुक कर आती जाती हैं