मेरा प्यार भी तुम हो
मेरी नफरत भी तुम हो
मेरा विश्वास भी तुम हो
मेरा अविश्वास भी तुम हो
मेरा मौन भी तुम हो
मेरे शब्द भी तुम हो
मेरा आदि भी तुम हो
मेरा अंत भी तुम हो
फिर क्यो ?
हमारा तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं है
बस ऐसे ही
1 month ago
My Expressions Of Life
मेरा प्यार भी तुम हो
मेरी नफरत भी तुम हो
मेरा विश्वास भी तुम हो
मेरा अविश्वास भी तुम हो
मेरा मौन भी तुम हो
मेरे शब्द भी तुम हो
मेरा आदि भी तुम हो
मेरा अंत भी तुम हो
फिर क्यो ?
हमारा तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं है
3 comments:
अपना अपने आपसे कैसा रिश्ता-जब मन से मन का एका होता है तब सब एक हो जाता है-कोई रिश्ता नहीं-मै तुम हूँ और तुम मैं!!
ek sawaal kah gaya sab.. de gaya saare jawaab bhi...... amzing..
क्योंकि हर रिश्ता का अहसास भी जरुरी नहीं की प्रत्यक्ष और पास हो…।
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