ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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Saturday, February 02, 2008

सौ बातो की एक बात हैं

तुम आये या मैने बुलाया
एक ही तो बात थी
प्याला स्नेह का
तुमने पीया मैने पिलाया
एक ही तो बात थी
तुम क्यो आये
ना मैने पूछा ना तुम ने बताया
एक ही तो बात थी
तुम चले गए
ना मैने रोका ना तुम ने पीछे देखा
एक ही तो बात थी
मैने तुमहें छोडा या तुमने मुझे छोडा
एक ही तो बात है
दिल मेरा टूटा या तुम्हारा टूटा
एक ही तो बात है
प्याला स्नेह का दोनो से छुटा
एक ही तो बात है

ना तुम्हारी जुबां पर नाम है मेरा
ना मेरी जुबां पर नाम है तुम्हारा
एक ही तो बात है
सोच मे मेरी आज भी तुम हो
सोच मे तुम्हारी आज भी मै हूँ
सौ बातो की एक बात हैं

4 comments:

annapurna said...

आपने लिखा हमने पढा
एक ही बात है
अगर आप न लिखतीं
हम कैसे जानते आपकी रचना शक्ति
सौ बातों की एक बात हैं

mehek said...

bahut badiya rachana hai badhai.

mehek said...

ab rachana se hamara matlab kavita se tha rachanaji.its pleasure to read nice poems on this blog.

ajay kumar jha said...

rachna jee,
sau baaton mein nahin jo baat hai,
sau baaton ke ek baat mein wo baat hai.