ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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Sunday, February 10, 2008

भावना हैं प्यार बहता है निरंतर

प्यार को बाँधना नही
प्यार मे बंधना सीखो
जिसने भी कोशिश कि है
प्यार को बांधने की
प्यार उससे दूर ही रहा है
पर जो बंधा है प्यार मे
प्यार ने उसको सरोबर किया है
प्यार नहीं है कोई वस्तु
प्यार नहीं है कोई जीव
कि हम तुम उसे बाँध सके
भावना हैं प्यार बहता है निरंतर
जिस को भी सरोबर करता है
वो ही इसको समझ सकता है
बाक़ी तो सब रिश्तो मे बंधते है
प्यार मे जो बंधता है
वो भावना और विश्वास मे
बंधता है

2 comments:

Sharma ,Amit said...

अच्छा है. काफ़ी दिन बाद एक गाना याद आ गया, खामोशी फ़िल्म का....
" हमने देखी है उन आंखों की महेकती खुशबु...
.....................................................
प्यार कोई बोल नही, प्यार आवाज नही
एक खामोशी है , सुनती है कहा करती है
ना ये रूकती है, न ठहरी है कहीं
नूर की बूँद है , सदियों से बहा करती है ...

Keerti Vaidya said...

VERY TRUE....DHERO LEKH AUR KAVIITAYE PADI..PAR APKI EK SAAF SUCHI KAVITA NEY MAATR KUCH SHABDO MEIN PREM KYA HAI..BATA DIYA....BHUT KHOOB