प्यार को बाँधना नही
प्यार मे बंधना सीखो
जिसने भी कोशिश कि है
प्यार को बांधने की
प्यार उससे दूर ही रहा है
पर जो बंधा है प्यार मे
प्यार ने उसको सरोबर किया है
प्यार नहीं है कोई वस्तु
प्यार नहीं है कोई जीव
कि हम तुम उसे बाँध सके
भावना हैं प्यार बहता है निरंतर
जिस को भी सरोबर करता है
वो ही इसको समझ सकता है
बाक़ी तो सब रिश्तो मे बंधते है
प्यार मे जो बंधता है
वो भावना और विश्वास मे
बंधता है
ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .
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Sunday, February 10, 2008
भावना हैं प्यार बहता है निरंतर
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2 comments:
अच्छा है. काफ़ी दिन बाद एक गाना याद आ गया, खामोशी फ़िल्म का....
" हमने देखी है उन आंखों की महेकती खुशबु...
.....................................................
प्यार कोई बोल नही, प्यार आवाज नही
एक खामोशी है , सुनती है कहा करती है
ना ये रूकती है, न ठहरी है कहीं
नूर की बूँद है , सदियों से बहा करती है ...
VERY TRUE....DHERO LEKH AUR KAVIITAYE PADI..PAR APKI EK SAAF SUCHI KAVITA NEY MAATR KUCH SHABDO MEIN PREM KYA HAI..BATA DIYA....BHUT KHOOB
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