ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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मीमांसा समीक्षा विवाद अपवाद

बुराइयों की मीमांसा करते करते
अच्छाइयों की समीक्षा करना
हम कबका भूल चुके
समय रहते चेत जाते
तो याद रहता की
विवादो की होती हैं मीमांसा
और
अपवादों की होती हैं समीक्षा
विवाद से अपवाद का सफर
बहुत था आसन बस
हम ही रास्ता भटक गए

4 comments:

राकेश खंडेलवाल said...

सुन्दर भाव लिखे हैं आपने

Kavi Kulwant said...

Ati sundar Rachna Ji!

MANVINDER BHIMBER said...

अपवादों की होती हैं समीक्षा
विवाद से अपवाद का सफर
बहुत था आसन बस
हम ही रास्ता भटक गए
ati sunder

रचना गौड़ ’भारती’ said...

bahut khoob likha hai.