ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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बुराइयों की मीमांसा करते करते
अच्छाइयों की समीक्षा करना
हम कबका भूल चुके
समय रहते चेत जाते
तो याद रहता की
विवादो की होती हैं मीमांसा
और
अपवादों की होती हैं समीक्षा
विवाद से अपवाद का सफर
बहुत था आसन बस
हम ही रास्ता भटक गए
4 comments:
सुन्दर भाव लिखे हैं आपने
Ati sundar Rachna Ji!
अपवादों की होती हैं समीक्षा
विवाद से अपवाद का सफर
बहुत था आसन बस
हम ही रास्ता भटक गए
ati sunder
bahut khoob likha hai.
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