स्वच्छता का दम भरते हो
ज़रा बताओ फिर क्यों
एक पिता की दो संतान
अगर दो माँ से हैं
तो आपस मे कैसे
और क्यों विवाह
करती हैं
मौन ना रहो
कहो की हम यहाँ
इस हिन्दुस्तान मे
इसीलिये रहते हैं
क्युकी हम यहाँ
सुरक्षित हैं
संरक्षित हैं
कानून यहाँ के
एक होते हुए भी
हमारी तरफ ही
झुके हुए हैं
कहीं और जायगे
तो कैसे इतना
प्रचार प्रसार कर पायेगे
बस हिन्दुस्तान मे ही ये होता हैं
सलीम को यहाँ सलीम भाई
नारज़गी मे भी कोई सुरेश कहता हैं
तुम भाई हो हमारे तो भाई बन कर रहो
हम रामायण पढे
तुम कुरान पढो
ताकि हम तुम कहीं ऊपर जाए
तो राम और अल्लाह से
नज़र तो मिला पाये
ऐसा ना हो की
पैगम्बर की बात फैलाते फैलाते
तुम उनकी शिक्षा ही भूल जाओ
हम को हमारी संस्कृति ने यही समझया हैं
जो घर आता हैं
चार दिन रहे तो मेहमान होता हैं
और रुक ही जाए
तो घर का ही कहलाता हैं
घर के हो तो घर के बन कर रहो
हम तुम से रामायण नहीं पढ़वाते हैं
तुम हम से कुरान मत पढ़वाओ
धार्मिक ग्रन्थ हैं दोनों
पर अगर किताब समझ कर पढ़ सके
कुछ तुम सीख सको
कुछ हम सीख सके
तो घर अपने आप साफ़ रहेगा
और स्वच्छ हिन्दुस्तान नेम प्लेट की
उस घर को कोई जरुरत नहीं होगी ।


8 comments:
बहुत सुन्दर!!
पर औंधे घड़े में कितना ही पानी डालो, भीतर नहीं जाने वाला।
:)
बहुत सुन्दर! लंगडे तैमूर से लेकर चुंधे चंगेज़ तक सभी बुतपरस्ती से हिदुस्तान को स्वच्छ करने का सपना लिए-लिए दफ़न हो गये मगर उनके भेजे को ज्ञान की रोशनी नसीब नहीं हुई. रश्दी आज भी लिख रहे हैं जबकि दुनिया भर में उनकी मौत का फतवा देने वाले को यमराज कभी के ले गए. सूरज रोज़ आता है मगर चमगादड़ के नसीब में एक दिन भी नहीं.
बहुत बढिया !!
हमारे मन की बात तो अवधिया जी ने पहले ही कह दी :)
jhakaas !!!!!!!!!!!!!!!!!!
बढिया है | इसके आगे कुछ सत्य ही कहूंगा तो आप हमारी टिप्पणी को हटा दोगे ... इससे अच्छा है की चुप ही रहो .... बस यही कहना था इसलिए आये थे ...
राम राम
एक पिता की दो संतान
अगर दो माँ से हैं
तो आपस मे कैसे
और क्यों विवाह
करती हैं
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ऐसा नहीं होता है, अपने ज्ञान का विस्तार कीजिये.
यह आपकी ही नहीं कई भारतीयों की आवाज है.
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