ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
COPYRIGHT 2007.© 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted. Adding this blog to Hindi Aggregators without permission is voilation of Copy Right .

Friday, July 29, 2011

बारिश की बूंदे

ये बारिश की बूंदे हैं
या आसमां से
जन्नत का नूर
धरती पर गिर रहा हैं
प्यासी धरती को सीच रहा हैं
और
ना जाने कितने
मनो को भिगो रहा हैं

5 comments:

वन्दना said...

bahut sundar khyaal

Suresh Kumar said...

Bahut sundar bhawavyakti...aabhaar
swaagat hai aapka mere blog par..

संजय भास्कर said...

बहुत ही खूबसूरत शब्‍दों का संगम ...बधाई इस बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये ।

कुमार राधारमण said...

अपना फलक
अपनी धरती
अपनी प्यास!

मीनाक्षी said...

प्रकृति प्रेम...प्रकृति में प्रेम.. प्रेम की प्रकृति..पाठक कुछ भी समझ कर आनन्द ले सकता है... बेहद खूबसूरत