मनुष्य दुनिया में
एकाकी आता हैं
एकाकी ही जाता हैं
शांति तब पाता हैं
जब दूसरो के जीवन में
नहीं झांकता हैं
बहुत से मनुष्य
एकाकी नहीं होते
अकेले होते हैं
वही संबंधो का
प्रदर्शन कर के
अपने अकलेपन को छिपाते हैं .
हे ईश्वर
जिनके पास सम्बन्ध हैं पर
फिर भी वो अकेले हैं
उनको
मानसिक विक्षिप्ता से बचाना
1 comments:
उम्दा सोच
भावमय करते शब्दों के साथ गजब का लेखन ...आभार ।
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