मजबूरियां
छीन लेती हैं
रास्ता चुनने का हक़
रास्ता सही हैं
या गलत हैं
कैसे होगा फैसला
अगर रास्ता बस हो
एक ही
चलना ही नियति हैं शायद
चुनना नहीं
मंजिल कैसे फिर पता होगी
छीन लेती हैं
रास्ता चुनने का हक़
रास्ता सही हैं
या गलत हैं
कैसे होगा फैसला
अगर रास्ता बस हो
एक ही
चलना ही नियति हैं शायद
चुनना नहीं
मंजिल कैसे फिर पता होगी
8 comments:
@ होता है रास्ता
जब एक ही सामने.
नहीं मिलता विकल्प चुनने का दूसरा तीसरा.
चलना नहीं चाहता यदि कोई उस पर
या तो बेमन से चलना पड़ता है
या फिर वहीँ रुककर क्रान्ति के बीज बोता है.
जो अंकुरित होकर विस्फोट रूप लेता है.
मन के असंमजस को दर्शाती हुई नज़्म.. बहुत सुन्दर. पर भाग्य और चाहत दोनों की राह अलग होती है . ऐसा मुझे लगता है .
hi rachna .nice one.
चलना ही नियति हैं शायद
चुनना नहीं...sundar shabd...mam mere blog par aapka swagat hai..
सही रास्ता चुनकर बढ़ना ही जीवन है
मजबूरियाँ गलत फैसला लेने को मजबूर करती है बहुत अच्छी रचना,सुंदर प्रस्तुति
नई रचना-काव्यान्जलि--हमदर्द-
द्वंद्व हीन
निष्प्राण जीवन
द्वंद्व में ही
प्राण जीवन
निष्प्राण हैं जो
डूब जायें
तैरने के लिए तो
चाहिए ही
लाश में भी
प्राण जीवन।
क्या करेंगे
जान कर हम
मंजिलें
हम चलेंगे
जब तलक है
प्राण जीवन।
सही रास्ता फिर भी चुनना ही होगा, जीवन सुचारू रूप से जीना जो है
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