ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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Friday, January 13, 2012

तलाश मंजिल की

मजबूरियां
छीन लेती हैं
रास्ता चुनने का हक़
रास्ता सही हैं
या गलत हैं
कैसे होगा फैसला
अगर रास्ता बस हो
एक ही
चलना ही नियति हैं शायद
चुनना नहीं
मंजिल कैसे फिर पता होगी

8 comments:

प्रतुल वशिष्ठ said...

@ होता है रास्ता
जब एक ही सामने.
नहीं मिलता विकल्प चुनने का दूसरा तीसरा.
चलना नहीं चाहता यदि कोई उस पर
या तो बेमन से चलना पड़ता है
या फिर वहीँ रुककर क्रान्ति के बीज बोता है.
जो अंकुरित होकर विस्फोट रूप लेता है.

Vijay Kumar Sappatti said...

मन के असंमजस को दर्शाती हुई नज़्म.. बहुत सुन्दर. पर भाग्य और चाहत दोनों की राह अलग होती है . ऐसा मुझे लगता है .

mamta said...

hi rachna .nice one.

ASHA BISHT said...

चलना ही नियति हैं शायद
चुनना नहीं...sundar shabd...mam mere blog par aapka swagat hai..

M VERMA said...

सही रास्ता चुनकर बढ़ना ही जीवन है

dheerendra said...

मजबूरियाँ गलत फैसला लेने को मजबूर करती है बहुत अच्छी रचना,सुंदर प्रस्तुति
नई रचना-काव्यान्जलि--हमदर्द-

देवेन्द्र पाण्डेय said...

द्वंद्व हीन
निष्प्राण जीवन
द्वंद्व में ही
प्राण जीवन

निष्प्राण हैं जो
डूब जायें
तैरने के लिए तो
चाहिए ही
लाश में भी
प्राण जीवन।

क्या करेंगे
जान कर हम
मंजिलें
हम चलेंगे
जब तलक है
प्राण जीवन।

कुश्वंश said...

सही रास्ता फिर भी चुनना ही होगा, जीवन सुचारू रूप से जीना जो है