ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।

इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर
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Monday, August 20, 2012

आज़ाद इस दुनिया में आयी हूँ आज़ाद ही रहूंगी


7 comments:

देवेन्द्र पाण्डेय said...

जहाँ यह भाव आया समझो आजादी उसी पल मिल गई।..सशक्त अभिव्यक्ति।

Sunil Kumar said...

बहुत ही सुंदर भावाव्यक्ति बधाई

Mired Mirage said...

बिल्कुल. आजादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है.
घुघूतीबासूती

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत सुन्दर रचना है...

Shah Nawaz said...

अच्छा लिखा है रचना जी...

आज़ादी बहुत बड़ा शब्द है, इसकी व्याख्या भी थोड़ी मुश्किल है... लेकिन यह सबका जन्मसिद्ध अधिकार है... जबतक की इस 'आज़ादी' से दूसरों की 'आज़ादी' का हनन ना हो...

Indian Home Maker said...

Well said!!! Exactly my thoughts.
"Sabse pehle to main azaadi chahti hoon, is prashn se ki kyon aur kisse mujhe azaadi chahiye."
Absolutely.

दिगम्बर नासवा said...

कुछ वाजिब प्रश्न खड़े करती है ये रचना ... सच है सबसे पहली आज़ादी चाहिए इस प्रश्न से की आजादी क्यों चाहिए ...