ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है ।
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ये ब्लोग कोलाज है शब्दो का क्योकि मै वह नहीं देख पाती जो सब देख पाते है.मेरी कविताओं मे अगर आप अपने को पाते है तो ये महज इतिफाक है । जिन्दगी की सचाईयाँ सबके लिये एक सी होती है सिर्फ नजरिया देखने का अलग अलग होता है । इस ब्लॉग पर जो भी लिखा मेरा निजी हैं उस दृष्टि कोण से आप असहमत हो तो कविता पढ़ कर भूल जाये और आगे जा कर अपनी पसंद के विचार खोजे

Thursday, May 21, 2015

लफ़्ज हो या एहसास

वो लफ्ज के सहारे
ब्यान करते रहे
हम एहसास उनके
उन लफ्जो को समझते रहे


एहसास कब लफ्ज़ो से
ब्यान होते हैं
ये भी हम समझते रहे

ज़िंदगी ने बस यही
सिखाया हैं हमें
जीना ही जिंदगी हैं

फिर लफ़्ज हो या एहसास
बस समझ का फेर हैं

1 comment:

kamlesh kumar diwan said...

sundar bhav bali kavita hai